Tuesday, 5 March 2019

चांद के बारे में कुछ रोचक तथ्य क्या है?

1. चंद्रमा दिखने में गोल लगता है लेकिन यह अंडे के आकार का है.
2. पिछले 41 साल से चांद पर कोई आदमी नही गया है.
3. चन्द्रमा पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है। चन्द्रमा 4.5 अरब साल पहले पृथ्वी और थीया (मार्स के आकार का तत्व) के बीच हुए भीषण टकराव के बाद बचे हुए अवशेषों के मलबे से बना था.
4. धरती से अगर चांद गायब हो जाए तो पृथ्वी पर दिन महज छह घंटे के लिए होगा.
5. चाँद का व्यास धरती के व्यास का सिर्फ चौथा हिस्सा है और लगभग 49 चाँद धरती में समा सकते हैं.
6. सौर मंडल के 63 उपग्रहो में चाँद का आकार 5 वे नंम्बर पर है.
7. चाँद का क्षेत्रफल अफ्रीका के क्षेत्रफल के बराबर है.
8. नील आर्मस्ट्रांग जब पहली बार चांद पर चले थे, तो उनके पास Wright Brothers के पहले हवाई जहाज का एक टुकड़ा था.
9. चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति पृथ्वी से कम होती है अगर आंकड़ों में बात की जाए तो चांद पर इंसान का वजन 16.5% कम होता है. यही कारण है कि चांद पर अंतरिक्ष यात्री ज्यादा उछलकूद कर सकते हैं.
10. क्या आपको पता है कि 1950 के दशक के दौरान अमेरिका ने परमाणु बम से चंद्रमा को उड़ाने की योजना बनाई थी.
11. नील आर्मस्ट्रोग ने चाँद पर जब अपना पहला कदम रखा तो उससे जो निशान चाँद की जमीन पर बना वह अब तक है और अगले कुछ लाखों सालो तक ऐसा ही रहेगा. क्योंकि चांद पर हवा तो है ही नही जो इसे मिटा दे.
12. आज तक महज 12 लोग ही चांद पर कदम रख पाए हैं.
13. जब अंतरिक्ष यात्री एलन सैपर्ड चांद पर थे तब उन्होंने एक golf ball को hit मारा जोकि तकरीबन 800 मीटर दूर तक गई.
14. अगर आप अपने इंटरनेट की स्पीड से खुश नहीं हैं तो आप चांद का रुख कर सकते है. जी हां, नासा ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाते हुए चांद पर वाई-फाई कनेक्शन की सुविधा उपलब्ध कराई है जिसकी 19 एमबीपीएस की स्पीड बेहद हैरतअंगेज है.
15. चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति कम है. किसी भी तरह का वायुमंडल का न होने का मतलब है कि सौर वायु और उल्कापिंड के आने का खतरा लगातार बना रहता है.
16. चाँद पर पानी भारत की खोज है. भारत से पहले भी कई वैज्ञानिको का मानना था कि चांद पर पानी होगा परन्तु किसी ने खोजा नही.
17. अपने बैग और एक अमेरिकन झंडे के अलावा एपोलो 11 के अंतरिक्ष यात्री चांद की धरती पर कुछ यादगार निशानी भी छोड़ गए थे।
18. चंद्रमा पर मनुष्य द्वारा छोडे गए 96 बैग ऐसे है जिनमें मल,मूत्र और उल्टी है।
19. चंद्रमा की सतह पर धूल का गुबार सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर मंडराता रहता है। इसका असली कारण अभी तक पता नहीं चल सका है।
20. चांद पर करीब 1 लाख 81 हजार 400 किलो का मानव निर्मित मलबा पड़ा हुआ है जिसमें 70 से अधिक अंतरिक्ष यान और दुर्घटनाग्रस्त कृत्रिम उपग्रह भी शमिल हैं।
21. पृथ्वी पर अगर चंद्र ग्रहण लगा है तो चांद पर सूर्य ग्रहण होगा।
22. चांद धरती के आकार का सिर्फ 27 प्रतीशत हिस्सा ही है.
23. चाँद का वजन लगभग 81,00,00,00,000(81 अरब) टन है.
24. पूरा चाँद आधे चाँद से 9 गुना ज्यादा चमकदार होता है.
25. अगर आप का वजन धरती पर 60 किलो है तो चाँद की low gravity की वजह से चाँद पर आपका वजन 10 किलो ही होगा.
26. चंद्रमा पृथ्वी से हर साल 3.78 सेमी दूर होता जा रहा है और अगले 50 अरब साल तक ऐसा ही होता रहेगा।
27. जब सारे अपोलो अंतरिक्ष यान चाँद से वापिस आए तब वह कुल मिलाकर 296 चट्टानों के टुकड़े लेकर आए जिनका द्रव्यमान(वजन) 382 किलो था.
28. चाँद धरती के ईर्ध-गिर्द घूमते समय अपना सिर्फ एक हिस्सा ही धरती की तरह रखता है इसलिए चाँद का दूसरा पासा आज तक धरती से किसी मनुष्य ने नही देखा.
29. चाँद का सिर्फ 59 प्रतिशत हिस्सा ही धरती से दिखता है.
30. चाँद के दिन का तापमान 180 डिगरी सेलसीयस तक पहुँच जाता है जब कि रात का -153 डिगरी सेलसीयस तक.
31. ये जानकर हैरानी होगी कि आपके मोबाइल फोन में अपोलो 11 यान के चंद्रमा लैंडिग के समय यूज किये गए कंप्यूटर की तुलना में अधिक कंप्यूटिंग शक्ति है।
32. Apollo-11 यान का चंद्रमा लैंडिग के समय बनाया गया Original टेप मिट गया था यह गलती से दोबारा इस्तेमाल कर लिया था।
33. अमेरिकी सरकार ने चांद पर आदमी भेजने और ओसामा बिन लादेन को ढूंढने में बराबर टाइम और पैसा खर्च किया : 10 साल और 100 बिलियन $.

क्या आप बता सकते हैं कि पृथ्वी की सतह से कितनी ऊँचाई (किमी में) तक कोई वस्तु गुरुत्वाकर्षण बल का अनुभव करती है और कैसे?

चलिऐ पहले इस बिन्दु पर चर्चा करते हैं कि पृथ्वी की सतह से कितने ऊपर कोई वस्तु गुरूत्वाकर्षण बल का अनुभव करेगी।
जैसे कि हम सभी जानते हैं कि प्रत्येक दो वस्तु एक दुसरे को अपनी और खीचती हैं और रोचक बात यह हैं कि ये बल कभी शुन्य नहीं होता, अगर आप बोल को 10,000 प्रकाश वर्ष दुर भी रख दें तब भी पृथ्वी अपने आकर्षण से ऊसे अपनी और खीचं लेगीं(हमने कल्पना कि हैं कि पुरे ब्रह्मांड में केवल पृथ्वी हैं)

किसी वस्तु पर कितना आकर्षण बल कार्य करेगा इसकी व्यख्या न्युटन ने कि थी और यह सुत्र कुछ इस प्रकार हैं
जहाँ M पृथ्वी का द्रव्यमान और m वस्तु का द्रव्यमान हैं r इनकी बीच की दुरी हैं
क्या आप ने कुछ नोटिस किया?
इस सुत्र को आप कितनी भी दुरी के लिऐ प्रयोग कर सकते हैं और क्योंकि ब्राह्मण्ड का अकार परिमीत हैं इस कारण आप पुरे ब्राह्मण्ड में वस्तु को कहीं भी रख दें पृथ्वी उसे अपनी और खीचं ही लेगी। इस पुरे ब्राह्मण्ड में ऐसा कोई बिन्दु नहीं जहां पर पृथ्वी द्वारा उत्पन्न गुरूत्वतिय बल शुन्य हों।
लेकिन आप कह सकते हैं कि पुरे ब्राह्मण्ड में केवल पृथ्वी ही तो नहीं, और भी अकाशीय पिडं हैं उनके प्रभाव का क्या?
अगर हम सभी पिंडो के द्वारा उत्पन्न बल कि गणाना कर लें और फिर उस ऊचाई को खोजें जहाँ पृथ्वी का गुरूत्वतिय बल शुन्य हो जायें तो धरती कि अलग अलग दिशा में इसका मान भिन्न भिन्न हो जायेगा।उदाहरण देखीयें मान लेते है आप भारत में हैं और चन्द्रमा आपके समक्ष हैं अब सोचिये कि आप उस ऊचाई कि गणाना कर रहें जहाँ गुरूत्वतिय बल शुन्य हो जायेगा, ठिक इसी समय आपका एक मित्र जो कनाडा में हो( दोनो धरती कि विपरीत छोर पर हैं और दोनो में 12,800 किमीं का रेखीय अन्तर हैं)
आपके इस मित्र कि गणाना आपकी गणना से भिन्न होगी क्योंकि वो चन्द्रमा से ज्यादा दुर होगा, इस कारण वास्तविक स्थिति में शुन्य गुरूत्वतिय बल बिन्दु कि गणाना करना जटिल हैं और समर के साथ साथ यह बिन्दु बदलता रहता हैं क्योंकि सभी अकाशीय पिंड चलायेमान हैं।
ये तो आपके सधारण प्रशन का उत्तर हुआ, अब आते हैं आपके सबसे महत्वपूर्ण प्रशन पर, जो आप ने सबसे अन्त में लिखा हैं “और कैसे?”
देखीय जिस सिध्दांत का उपयोग मैंने ऊपर गणाना में किया और जिसे न्युटन ने प्रतिपादित किया था वो यह तो बताता हैं कि गुरूत्वतिय बल कितना और किस दिशा में लगेगा किन्तु यह नहीं बताया कि क्यों लगेगा ? और संयोगवश ये ही आपका प्रशन भी हैं।
इस क्यों कि व्यख्या आइस्टिनं ने कि। असल में जितने भी अकाशिय पिडं हैं वे सब स्पेस-टाइम क्रव में एक डिस्टोरशन पैदा करते हैं जो उस अकाशीय पिंड के चारो और मौजुद स्पेस टाइम क्रव को अपनी आप पास विककृत कर देता है और ये कुछ इस तरह का दिखता हैं

जो यें ढलान आप को दिख रही है ये ढलान ही गुरूत्वतिय बल का कारण हैं और ये ही आपके क्यों का उत्तर हैं
संक्षेप में कहूँ तो द्रव्यमान अपने आस पास मौजूद स्पेस टाइम में एक क्रव पैदा कर देता हैं और ये क्रव ही हमें गुरूत्वतिय बल का अभास करवाता हैं
इस से एक बडी चौकानें वाला निष्कर्ष आइस्टिनं ने निकाला, उनके अनुसार गुरूत्वतिय बल कोई वास्तविक बल नहीं बल्कि इस स्पेस टाइम क्रव के कारण होने वाला अभास भर हैं
……..समाप्त।

ऊष्मा एवम ताप में क्या अंतर है? आसान भाषा में उदहारण के साथ ?

देखिये उष्मा और ताप (Heat and Temperature) में अंतर है कि “उष्मा किसी पदार्थ के सारे मॉलीक्यूल की कुल ऊर्जा है जबकि ताप वो औसत गति है जिससे वह गति करते हैंं। उष्मा स्त्रोत है जबकि ताप उसका प्रभाव है।”
चूंकि बच्चों को इस तरह से समझ नहींं आएगा। उन्हें आप एक उदाहरण से समझाएंं। उनसे कहें मान लीजिये हमारे पास दो पानी की टंकिया है। बिल्कुल वैसी जैसी नीचे चित्र में दी है -


इन दोनों ही टंकियों में पानी भरा है। टंकियां पूरी तरह नहींं भरी हैंं, इसके जल स्तर में अंतर है। एक थोड़ी ज्यादा भरी है और दूसरी थोड़ी खाली है।
अब यदि हम इन टंकियों को कोई पदार्थ मान लेंं तो इन टंकियों में भरे हुए पानी की कुल मात्रा इनकी उष्मा है और टंकियों का जल स्तर उनका ताप है।
हम जल स्तर (ताप) के द्वारा अंदाजा लगा सकते हैंं कि टंकी में कितना पानी (उष्मा) है। साथ ही अगर आपसे कोई कहे कि टंकी में इतनी मात्रा या लिटर पानी भरा है तब भी आप उसके जल स्तर (ताप)का अंदाजा लगा सकते हैंं। मुझे यकीन है अब आप को अंतर समझ आया होगा। आगे-
अब हमारे पास अलग अलग जल स्तर (ताप) वाली दो टंकियां थी। हमने दोनों ही टंकियों को नीचे एक पाइप से जोड़ दिया तो ज्यादा जल स्तर (ताप) वाली टंकी से पानी कम जल स्तर (ताप) वाली टंकी में जाएगा। तब तक जाएगा जब तक कि दोनों ही टंकियों में पानी का जल स्तर (ताप) समान नहींं हो जाता। इससे कम पानी की मात्रा वाली टंकी में पानी की मात्रा (उष्मा) बढ़ जाएगी।
बिल्कुल उष्मागतिकी के शून्यक नियम (Zeroth law of thermodynamics) के अनुसार जब दो अलग तापमान वाली वस्तुएं साथ रखी जाती हैंं तो उष्मा ज्यादा ताप से कम की तरफ चलता है जब तक कि दोनों का ताप समान नहींं हो जाता -

पृथ्वी अपने अक्ष पर किस बल से घूमती है और हमें उसके घूमने का एहसास क्यों नहीं होता है?

पृथ्वी अपने अक्ष पर क्यों घूम रही है -
पृथ्वी या किसी और ग्रह का अपने अक्ष पर घूमने के लिए कोई भी बल काम नही करता। सारे ग्रह उनके निर्माण के समय से ही घूम रहे है। इनके लगातार घूमते रहने की वजह है न्यूटन की गति का प्रथम नियम, जिसके अनुसार कोई वस्तु जिस स्तिथि में है उसी स्तिथि में रहेगी जब तक कि कोई बाहरी बल उस पर काम नही करता। चूंकि सारे ग्रहों ने घूमना निर्वात में शुरू किया जहां कोई बाहरी बल काम नही कर रहा जिससे वह रुक सके। इसीलिए वह लगातार घूम रहे है।
सवाल बनता है ग्रहो को घूमना शुरू ही क्यों हुआ। तो इसका कारण माना जाता है कि जब सारे ग्रह सिर्फ गैस के गोले थे उस समय जरूर कोई सुपरनोवा तारा सोलर सिस्टम के पास फटा होगा। जिसकी तरगों ने एक समान एंगुलर मोमेंटम देकर ग्रहों को एक दिशा में ही घूमाना शुरू किया।

सके बाद भी सवाल बनता है, फिर तो सारे ग्रह एक ही दिशा में घूमने चाहिए। कुछ ग्रह उल्टी दिशा में क्यों घूम रहे है। इसका कारण है कि उनका किसी पिंड (या उल्कापिंड) से टकराव हुआ होगा। जिससे वह उल्टी दिशा ने घूमने लगे। अगर आप सोच रहे है कि अगर कोई पिंड अगर पृथ्वी से भी उल्टी दिशा में टकराए तो क्या वह भी उल्टी दिशा में घूमने लगेगी। जी हां यह पूरी तरह सम्भव है।
हमें पृथ्वी के घूमने का एहसास क्यों नही होता -
क्योंकि हमारे चारों तरफ की सभी चीजें भी समान गति से घूम रही है। इस कारण हमें अंतर पता नही चल रहा या कहें अब हम इसके आदि हो गए है।
फुटनोट

दौडने के बाद हमारी सांस क्यों फूल जाती हैं?

भोजन से ग्लुकोज + सांस से ऑक्सीजन = मांसपेशियों को शक्ति
कोई भी शारीरिक क्रिया-कलाप करने में ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। हमोर भीतर ग्लुकोज ऑक्सीडाइज्ड होकर ऊर्जा प्रदान करता है। जितना अधिक श्रम होगा, उतनी अधिक शक्ति चाहिए इसलिए उतनी ज्यादा ऑक्सीजन अनिवार्य है। इसलिए तेजी से सांस चलने लगती है। तेज सांस के द्वारा तीव्रता से उत्पन्न हो रही कार्बन डाईऑक्साइड को बाहर निकालना भी जरूरी है। एकदम से तेज भागना शुरू करना या फिर दौड़ने से पहले खुद को वार्मअप न करना इन दो के अलावा सांस फूलने का सबसे आम कारण है दौड़ते समय सही विधि से सांस न लेना। नए धावकों के अलावा कई अनुभवी धावक भी दौड़ते समय सही सांस लेने के महत्व को नहीं समझते।
यदि आप जल्दी-जल्दी कम गहरी सांसें लेते हैं तो इसका मतलब है कि आप न सही से ऑक्सीजन ले रहे हैं और न कार्बन डाईऑक्साइड छोड़ रहे हैं। इस तरह आप केवल फेफड़ों के ऊपरी हिस्से का इस्तेमाल कर रहे हैं। फेफड़े के इस ऊपरी हिस्से में ऑक्सीजन और कार्बन डाई ऑक्साइड के आदान-प्रदान के लिए कम मात्र होती है। पर जब आप नियंत्रित और गहरी सांसें लेते है, ऐसे में सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया सहज होती है।
जब हम छोटी सांसें लेते हैं तो हमारा दिमाग भी अस्थिर होता है। पर जब हम गहरी सांसें लेते हैं तो हमारा मस्तिष्क भी शांत होता है और व्यक्ति को लंबी आयु मिलती है। इसलिए किसी व्यक्ति को सबसे पहला प्रयास सांसों को नियंत्रित करने का करना चाहिए। यह बात धावकों पर भी लागू होती है। आपको गहरी लंबी सांसें लेनी चाहिए, पर साथ ही यह भी समझें कि जितना बेहतर तरीके से सांस लेते हैं, उतना बेहतर सांसें छोड़ना भी आना चाहिए। यदि आप सांसें छोड़ते समय फेफड़े खाली नहीं करेंगे तो उसमें हवा अंदर लेने के लिए जगह कैसे बनाएंगे?
दौड़ के वेग के साथ जिस दूसरी चीज पर ध्यान लगाने की जरूरत होती हैं वह है आपकी सांसें। गहरी लंबी सांसें लें और गहरे लंबे प्रश्वास छोड़ें। इससे आपकी मांसपेशियों को आराम मिलेगा। सामान्य गति में दौड़ते हुए आप बात कर सकेंगे। जैसे-जैसे गति तेज होती है, अपकी सांस लेने की प्रक्रिया भी प्रभावी ढंग से तेज हो जाएगी। गहरे सांस लेने के अभ्यास से आप न सिर्फ सांस उखड़े बिना लंबा दौड़ पाएंगे, बल्कि तेज और प्रभावी ढंग से दौड़ सकेंगे।
कुछ जरूरी सलाह व निर्देशों को अपना कर आप खुद को प्रभावी धावक बना सकते हैं। दौड़ लगाने से पहले के पांच मिनट चलते हुए आप केवल अपनी सांसों पर ध्यान लगाएं। मेरी सलाह होगी कि आप गहरी लंबी सांस लें, उसे एक या दो सेकेंड के लिए रोक कर रखें और फिर सांस बाहर छोड़ें। यह अभ्यास करने से आप समझ जाएंगे कि कहां सही महसूस कर रहे हैं।
लंबी दौड़ में यदि आपने अपने शरीर को अकड़ा रखा है तो आपको जल्दी ही अपने पीठ के ऊपरी और निचले हिस्से के अलावा कंधों में दर्द होना शुरू हो जाएगा। थकावट और दर्द अनुभव होगा। इन्हीं हिस्सों में अधिक तनाव होने से आप कम गहरी और तेज-तेज सांसें लेते हैं और तेज दौड़ नहीं पाते।
बगैर सांस फूले कैसे ज्यादा लम्बी दौड़ लगाएं?
1 अपने दौड़ने के तरीकों को जाँचेंः अपने ज्यादा लम्बा दौड़ने का लक्ष्य निर्धारित करने के पहले, मूलभूत चीजों को सीख लेना अच्छी युक्ति है। अजीब तरीकों का उपयोग करने से शायद कोई फर्क ना पड़े जब आप दो-तीन किलोमीटर ही दौड़ रहें हों, पर जब आप अपनी दौड़ में ज्यादा समय और दूरी को सम्मिलित करते हैं तो बड़ा फर्क पड़ता है।
अपनी भुजाओं से व्यायाम करें और सुविधाजनक छलांगे लगाएं।
अपने ऊपरी शरीर को अकड़ा हुआ रखने की बजाय आराम की स्थिति में रखें।
अपनी नांक से सांस लें और मुहं से छोड़ें।
सुनिश्चित करें कि आप आरामदायक जूते पहन के दौड़े जो आपके पैरों में सही फिट हों।
2 दौड़ का समय देखेंः अपना समय बढ़ाने के निर्णय के पहले, देखे कि आपको सही रूप से किस चीज पर काम करना है। अपनी अगली दौड़ में घडी पहने और अपना समय देखें। आप अपने समय में छोटे बढ़ाव करें, ताकि आप समझ सकें कि आपका शुरुवाती बिंदु क्या होगा।
जब तक आपको रुकना ना पड़े तब तक दौड़ें। तब तक दौड़ते रहें जब तक आप थक ना जाएं और आपके पैर दुखने ना लगें। आप जितना सोचते हैं संभव है कि आपकी सहनशक्ति उससे ज्यादा हो
क्योंकि ज्यादा लम्बा दौड़ने में समर्थ होने का बड़ा हिस्सा है असुविधा से निबटने की ज्यादा क्षमता होना।
अपने शुरुवाती समय पर एक लक्ष्य निर्धारित करने पर विचार करें। अगर आप 15 मिनट दौड़ सकते हैं, तो आपका लक्ष्य इसे 30 मिनट करना हो सकता है। अगर आप 30 मिनट दौड़ सकते हैं, तो आपका लक्ष्य एक घंटे तक दौड़ना हो सकता है।
3 हर हफ्ते 5- 10 मिनट जोड़ते जाएँः यह बहुत ज्यादा नहीं भी लग सकता, पर अपनी सहनशक्ति के अनुसार हर हफ्ते 5- 10 मिनट जोड़ना आपका बहुत शीघ्र विकास करेगा। ये अच्छा है, स्थाई समय को जोड़ना आपको ज्यादा लम्बी छलांग लगाने या अपनी मांसपेशिओं पर ज्यादा दबाव डालने से बचा लेगा। स्वयं से अतिरिक्त समय दौड़ने का वादा करें- भले ये एक संघर्ष ही क्यों ना हो- आप इसी तरीके से सहनशक्ति का निर्माण कर सकते हैं।
अगर आप पहली बार 30 मिनट से कम दौड़े हों, तो हर हफ्ते उसमे 5 मिनट का बढ़ावा करें। जब तक समय बढ़ाते रहें जब तक आप 30 मिनट तक न पहुंचे
4 अपनी गति को लेकर चिंता ना करेंः आप अपनी गति पर बाद में काम कर सकते हैं- अभी के लिए, सिर्फ अपने लम्बा दौड़ने के लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें। आपकी दौड़ इतनी आसान होनी चाहिए कि आप दौड़ते हुए बातचीत कर पाएं। ऐसी गति में दौड़ें जहाँ आपको लगे कि आप अनिश्चित काल तक दौड़ सकते हों। स्वयं को दोनों तेज ”और” लम्बा दौड़ना आपको नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए अगर आप गति को लेकर चिंतित हैं, तो आप एक निश्चित समय अवधि तक दौड़ने तक पहुचने के बाद अपनी गति को तेज करने का लक्ष्य निर्धारित कर लें।
5 अपने शरीर को सही ईंधन उपलब्ध करवाएंः आप वर्क आउट करने के पहले क्या खाते और पीते हैं इससे फर्क पड़ता है। अगर आपको भारीपन या पेट फूलने का अहसास होता है तो, आप उतना लम्बा नहीं दौड़ पाएंगे। खुद को पूरी तरह हाइड्रेटेड रखना और पोषक तत्वों से परिपूर्ण रखना बहुत महत्वपूर्ण है ताकि आप पूरी दौड़ के दौरान सहनशील बने रह सकें।
जहाँ आपको अपने शरीर में ईंधन की जरूरत होती है, तो जरूरी नहीं कि आप कार्बोहाइड्रेट का दौड़ने से पहले जरूरत से ज्यादा सेवन करें। ये आपको वास्तविक रूप में ज्यादा धीमा कर सकता है। जब तक आप मैराथन में ना दौड़ रहें हों, तब तक आपके शरीर को दौड़ पूरी करने के लिए बहुत ज्यादा कार्बोहाइड्रेट की कोई जरूरत नहीं है।
अपने दौड़ने के पहले, थोड़े से बादाम, एक केला या पीनट बटर के साथ आधी बेगल ब्रेड खाके आजमाएं। ये आपको बिना वजन कम करें दौड़ने की सक्षमता प्रदान कर सकता है।
स्पोर्ट-ड्रिंक्स से खुद को हाइड्रेट (पानी की कमी पूरी करना) ना करे- इसकी बजाय सिर्फ पानी पियें। फिर से, आपके शरीर को अच्छे से काम करने के लिए अतिरिक्त शक्कर की जरूरत नहीं है। अंत में, अतिरिक्त कैलोरीज आपको अच्छे रंग रूप में रहने में परेशानी ही उत्पन्न करता है।
6 अपने प्रशिक्षण के समय का पालन करेंः सहनशीलता विकसित करना तब हो पता हैं जब आप हफ्ते दर हफ्ते की योजना बना कर उस पर टिके रहते हैं। अगर आप बीच में कुछ हफ्ते छोड़ देतें है, तो आपकी फिटनेस गिरेगी और आपको इसे फिर से निर्मित करना होगा। अगर आपको अतिरिक्त प्रशिक्षण के लिए, बड़े हुए ब्रेक की जरूरत पड़े तो ठीक है- तो बस वापसी करें और समय को फिर से बढ़ाना शुरू करें। फिटनेस एक चलता हुआ काम है, आप कई बार सुपर-फिट और कई बात थोड़ा कम फिर महसूस कर सकते हैं- ये इस खेल का हिस्सा है।
7 जरूरत से ज्यादा कोशिश ना करेंः अपनी योजना को पीछे छोड़ कर और ज्यादा 10 मिनट जोड़ना उलटा पड़ेगा। आपके शरीर धीरे धीरे मांसपेशिया और फिटनेस का निर्माण करने के लिए समय की आवश्यकता होती है, और आप अगर जरूरत से ज्यादा प्रयास करते हैं तो आप स्वयं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। आप अगर धीरे धीरे और निश्चित तौर पर सहनशक्ति को विकसित करते हैं तो आप ज्यादा सफलता हासिल कर सकते हैं। आराम के दिनों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना सुनिश्चित करें। हर रोज ना दौड़ें- आपको खुद की मांसपेशियों को आराम करने और तकलीफ से उबरने के लिए हफ्ते में कम से कम 1 या 2 आराम करना चाहिए। जब आप दौड़ ना रहे हों तो कुछ और करें। बाइकिंग, तैराकी, या हाईकिंग जैसे विकल्पों को आजमाएं।
8 दौड़ने/चलने की रणनीति: जब आप सहनशीलता को विकसित कर रहे हों, तो आप अपनी दौड़ो में समय जोड़ने में असहज महसूस कर सकते हैं। आप ऐसी स्थिति पर पहुंच सकते हैं जब आपको लगे कि आप अगला कदम नहीं उठा सकते। ये ठीक है- आप थोड़ा धीमे हो सकते हैं और थोड़ा चल सकते हैं। तब तक चलें जब तक आप दौड़ने में समर्थ ना हो जाएं, फिर दुबारा दौड़ना शुरू करें। अपने सोचे हुए समय तक पहुँचने तक आपको अपने दौड़ने और चलने में बदलाव करते रहें।
ये दौड़ने/चलने की रणनीति विशेष रूप से तब मददगार है जब आप शुरुवाती धावक हों। हर बार जब आप दौड़ें तो अपना समय बढ़ाएं और अपने हर वर्कआउट के दौरान अपने चलने का समय घटाने की कोशिश करें। आखिर में, आप ज्यादा से ज्यादा दौड़ पाएंगे।

Awesome Particle Physics Facts In Hindi

इंसानी दिमाग अपनी बुद्धि के जरिए बहुत कुछ खोज कर निकाल सकता है। प्राचीन काल से ले कर आज तक वह अपने बुद्धि-कौशल के जरिए तरह-तरह के अत्याधुन...